Friday, June 25, 2010

जैक्सन - एक अकेला, अनसुलझा सितारा

'In Our Darkest Hour
In My Deepest Despair
Will You Still Care?
Will You Be There?
In My Trials
And My Tribulations
Through Our Doubts
And Frustrations
In My Violence
In My Turbulence
Through My Fear
And My Confessions
In My Anguish And My Pain
Through My Joy And My Sorrow
In The Promise Of Another Tomorrow
I’ll Never Let You Part
For You’re Always In My Heart'


कभी ये पंक्तियाँ जैक्सन ने हमारे लिए गाई थीं पर आज हम इन्ही पंक्तियों को जैक्सन को समर्पित कर रहे हैं। एक ऐसा सितारा जिसने दुनिया भर में जाने कितने लोगों की आँखों में उसके जैसे बनने के कितने सपने भरे..कितने कदमों को एक नया अन्दाज़ दिया..नई थिरकन दी...आज एक साल हुए शांत पड़ा है, एनर्जी से भरपूर अपने स्टेज शो पर कभी न थकने वाला MJ आज कहीं छ:-साढ़े छ: फीट के अन्दर चुपचाप पड़ा है...
अपने  करीबन हर गाने से हमें सांत्वना और आशा देने वाला माइकल आज एक अजीब सी चुप्पी साधे है, एक ऐसी चुप्पी जो कभी टूट नहीं सकती.....एक ऐसी खामोशी जिसे कभी आवाज़ नहीं दिया जा सकता...
मैं नहीं जानती MJ के ऊपर जिस भी तरह के आरोप लगाए गए वो सही थे या गलत (हालांकि एक दशक से भी अधिक समय तक चली इस लड़ाई में कोर्ट ने ज़्यादातर मामलों में उन्हें बरी कर दिया) लेकिन 17 साल तक FBI और मीडिया के एक वर्ग से एक अजीब सी लड़ाई लड़ता यह कलाकार सुकून के लिए हमेशा संगीत और नृत्य की ही गोद में आया ..संगीत ही उसकी दवा थी, संगीत ही उसकी दुआ थी...
और इस दुआ के लिए किंग ऑफ पॉप के नाम से मशहूर MJ के हाथ सिर्फ उसके लिए ही नहीं उठते थे बल्कि दुआओं के रूप में निकले उसके कई अधिकतर गाने सामाजिक सन्देशों से भरे पड़े थे....'हील द वर्ल्ड' 'ब्लैक ऑर व्हाइट' 'अर्थ सॉंग' जैसे जाने कितने गाने हैं जिसने हमें इस दुनिया को एक पॉज़िटिव टच देने को प्रेरित किया, जिसने हमें बताने की कोशिश की कि हम कहाँ गलत जा रहे हैं, क्या गलत कर रहे हैं और इसे कैसे हम 'हील' कर सकते हैं.....
हालांकि दुनिया भर को अपने गानों से आशा और सांत्वना देने वाले इस कलाकार को खुद कितनी शांति मिली इसका पता नहीं...उसके जीवन के खालीपन को हम सबने उसके कई  गानों में महसूस किया....'विल यू बी देयर', 'स्ट्रेंजर इन मास्को', 'आइ विल बी देयर', 'लीव मी अलोन' ऐसे कई गाने हैं जिसमें जैक्सन के मुश्किल जीवन के दर्द को समझा जा सकता है...
इन सबके अलावा 'हिस्ट्री' 'ब्लड इन द डांस फ्लोर' 'जैम' 'घोस्ट' जैसे भी कई गाने हैं जिसे सुनते ही पाँव जैक्सन के स्टेप्स पर थिरकने को मचलने लगते हैं....उसके मून वॉक्स, उसके नीचे से चार इंच छोटे पैंट, हैट, ग्लव्स और इन सबके बीच उसका अपना स्टाइल..कोई और हमें नहीं दे सकता....
जीवन के समाप्त होने के एक वर्ष बाद ऐसा लगता है कि मौत ने भी उसके साथ नाइंसाफी की...
जब अपनी सभी लड़ाईयाँ लड़ते हुए MJ ने अपना कमबैक फिक्स किया और दुनिया का सबसे बड़ा एंटरटेनर हमें एक बार फिर अपने साथ, अपने संगीत के साथ कहीं और उड़ा ले जाने की तैयारी करने लगा तो उस पल का बेकरारी से इंतज़ार करती पूरी दुनिया को उस शो से कुछ दिनों पहले 25 जून 2009 को एक सन्नाटेदार खबर सुनने को  मिली......



MJ is no more.......................
                                                                                                                       


But MJ..we know that you will be there for me for us for everyone..always...through your dance, through your songs we will always get in touch with you....Yes you are there in our heart....
We all love you...Thank u for spending 50 years of your life in our world...Thank u..

Friday, June 4, 2010

काली आज़ादी

एक अजीब तनहाई है
चारों तरफ एक शोर से घिरी,
शोर
अविश्वास का, अनमनेपन का, गहरे विषाद का,
गुस्से का, अनास्था का, अनजानेपन का।
एक अजीब सन्नाटे को ख़ुद से लपेटे
यह ज़िंदगी
जितनी गुज़रती है, उतनी ही खुदगर्ज़ होती जाती है
बेईमान होती जाती है, ख़तरनाक होती जाती है।
एक काली आज़ादी है जैसे
अंधकार की आज़ादी,
धोखेबाज़ी की आज़ादी,
दूर होते रहने की आज़ादी।
वह घास जो दूर से हरी दिखती है
उसके जितने पास जाओ, वह रेत की तरह पीली होती जाती है
उसे आज़ादी मिली है पीले होने की।
उस घास में दर्प है, अहंकार है
पीले होने का,
काली आज़ादी का
जो उसे अंधेरी ही सही
पर
आज़ादी तो देती है।

Saturday, April 3, 2010

याद आते हो

सागर किनारे की लहरें जब छूती हैं मुझे ,
तुम याद आते हो
डूबते सूरज के पीछे से झाँकते हो
धीरे से मुस्कुराते हो,
तुम याद आते हो।
अमलतास के पीले फूल पूछते हैं मुझसे
पूरब की खिड़की मेरी बंद है कब से
पीपल के सूखे, झड़े हुए पत्ते
उड़ते-उखड़ते तुम्हें चाहते हों जैसे
पीलेपन में इनके जब तुम छा जाते हो
धीरे से आकर इन्हें थपथपाते हो,
तब याद आते हो।
परछाईयों तक पसरकर शाम की मरियल धूप
मांगती है मुझसे अपना सुनहरा रंग-रूप
शिकवा करती है तुम्हारी यह पागल हवा
पूछती है कहाँ गई वह सोंधी सबा
अनजान बनकर दामन जब छोड़ जाते हो
हसरतों को इनकी जब आज़माते हो,
तुम याद आते हो।

Friday, March 26, 2010




जंगली मन का जीना,
जैसे हर दिन एक नया जंगल
जीना...
जंगली मन के साथ,
सुबह-शाम-दिन-रात..

Saturday, March 6, 2010

कुछ ऐसे सरल उपाय जिन्हें अपनी दिनचर्या में शामिल करके आप तनाव और इसके प्रभावों को अपने-आप से कोसों दूर रख सकते हैं...पढ़िए,,आसान हैं और मजेदार भी!

हमने अक्सर लोगों से यह सुना है कि ज़िन्दगी हमें एक या अधिक-से-अधिक दो मौके देती है लेकिन यदि आप जीवन में अधिक से अधिक मौके पाना चाहते हैं तो हर परिस्थिति में अपने-आप को शांत और धैर्यवान बनाने की कोशिश कीजिए। हालांकि आज की भागदौड़ भरी ज़िन्दगी में हममें से अधिकतर लोग ऐसा कर नहीं पाते। बढ़ती महंगाई, बच्चों की पढ़ाई, करियर, डेडलाइनें, ट्रैफिक जाम,...कई ऐसी चीज़े हैं जिनसे बचा नहीं जा सकता। तनाव हमारे जीवन में ऐसा घर कर गया है कि इसे अपनी जीवनचर्या से निकालना असम्भव सा हो गया है।
शायद हममें से कई लोग यह नहीं जानते कि अधिक तनाव हमें कई तरह की शारीरिक समस्याएँ देता है, जिनमें से कुछ इस प्रकार हैं: मांसपेशियों का खिंचाव, चिंता, चक्कर आना, दिल की धड़कनों का तेज़ होना, सर में दर्द, भूख कम लगना, अस्थमा, मधुमेह, एलर्जी, पीठ का दर्द, शरीर की प्रतिरोधक क्षमता का कम होता जाना, हाईपरटेंशन होना, आत्मविश्वास की कमी, डर, डिप्रेशन, हृदय संबंधित रोग और यहाँ तक कि कैंसर भी। इसके अलावा तनाव की वज़ह से हमें अल्सर, माइग्रेन तथा पाचन संबंधित बीमारियाँ भी हो सकती हैं।
इन घातक बीमारियों का शिकार होने से बेहतर है कि हम तनाव को अपने जीवन से निकाल बाहर करें और यदि हम इसे अपने जीवन से निकाल नहीं सकते हैं तो इसे अपने ऊपर हावी न होने देने के तरीकों के बारे में जानें और इन बीमारियों से दूर एक बेहतर और खुशहाल जीवन बिताएँ। ऐसे कई तरीके हैं जिनकी मदद से हम इसी तनावग्रस्त दुनिया में रहते हुए और यही जीवन जीते हुए कई बीमारियों के जड़ इस तनाव से दूर रह सकते हैं। इन नुस्खों को अपनाइए और देखिए कि कैसे तनाव आपके लिए कम खतरनाक होता जाता है:
1. मसाज कराएँ मसाज हमारे शरीर और मन दोनों को शिथिल करता है और यहीं से हमारे मन को शांति मिलनी शुरु होती है। कहते हैं जब शरीर को आराम मिलता है तो मानसिक चिंताएँ अपने-आप कम होने लगती हैं। मसाज हमारे रक्त संचार को बढ़ाता है और बढ़ा हुआ रक्त संचार हमारे शरीर को ताज़ा ऑक्सीजन लेने में सहायक होता है। और यह तो हम सभी जानते हैं कि ताज़ा ऑक्सीजन हमें कई बीमारियों से बचाता है। तो जब भी तनाव हो मसाज कराएँ और वैसे भी यह सुविधा तो आप घर बैठे प्राप्त कर सकते हैं। वैसे मसाज आपको टच थेरैपी भी उपलब्ध कराता है जो तनाव मिटाने में काफी सहायक सिद्ध होता है।
2. एक्यूप्रेशर और एक्यूपंचर: ये दोनों ही तनाव भगाने की एक बहुत ही कारगर और आसान तकनीक है क्योंकि आप इसे कहीं भी और कभी भी इस्तेमाल में ला सकते हैं। इनसे आप सर दर्द, एलर्जी, गर्दन और पीठ के दर्द तथा कई प्रकार के न्यूरोलॉजिकल डिसॉर्डर इत्यादि से छुटकारा प्राप्त कर सकते हैं।
 3. योग व व्यायाम: यह तो आजकल हम सभी जानते हैं कि नियमित योग, व्यायाम, सुबह-शाम की वॉक और साइकिलिंग जैसी गतिविधियाँ न हमें सिर्फ शारीरिक रूप से चुस्त-दुरुस्त रखती हैं बल्कि किसी भी प्रकार की नकारात्मक विचारों से दूर रख कर मानसिक रूप से भी फिट रखने में सहायक होती हैं।

4. हँसे-गाएँ: और न सिर्फ हँसे बल्कि खुल कर, जी भर कर हँसे, और यदि हँसी ऐसे न आए तो कोई कॉमेडी फिल्म देखें, कोई मज़ेदार पुरानी बात याद करें...
बच्चों के साथ खेलें या ज़ोर-ज़ोर से अपना पसन्दीदा गाना गाएँ, यह न सोचें कि पड़ोसी क्या कहेगा; सोचें कि अगर पड़ोसी कुछ कहेगा तो उसे भी साथ बिठा लेंगे गाने को।
5. कोई प्यारा सा जानवर पालें और उसके साथ खूब खेलें: तनाव भगाने का एक और भी बहुत कारगर तरीका है वह है पालतू जानवर। घर में कोई न कोई जानवर पालें - बेहतर होगा कि कुत्ते पालें क्योंकि कुत्ते प्यार दर्शाने में बहुत माहिर होते हैं और आपके प्रति अपने अन्दर के प्यार को सुबह-शाम दर्शाकर वे आपके अन्दर खुशी और उत्साह का संचार करते हैं। इसके अलावा कुत्ते आपको सुरक्षा का अहसास भी कराते रहते हैं।
6. कहीं घूमने जाएँ: मौका मिलते ही घूमने निकल जाएँ, यदि परिवार और दोस्त साथ हों तो क्या बात है, लेकिन यदि कोई साथ न आ पा रहा हो तो अकेले ही भ्रमण करें। अकेले घूमने से कई बार हमारा ध्यान उन चीज़ों पर जाता है जिनपर किसी के साथ रहने से हमारी नज़र तक नहीं पड़ती।
 7. अपनी आलोचना को सकारात्मक रूप में लेना शुरु करें: हालांकि यह बहुत ही कठिन कार्य है लेकिन की गई आलोचना की कटुता को नज़रअन्दाज़ करते हुए इसकी सच्चाई पर ध्यान दें और उस क्षेत्र में सकारात्मक रूप से काम करना शुरु करें। याद रखें आलोचना ही हमें आगे भी बढ़ाती है और आलोचना ही हमें नीचे भी गिराती है, यह हमपर निर्भर करता है कि हम इसमें से क्या चुनते हैं।
8. तनाव में कोई निर्णय न लें|
9. खाली समय में कुछ रचनात्मक कार्य करें। किसी स्पोर्ट्स क्लब से जुड़ें और हर शाम नियमित रूप से वहाँ जाएँ, जी भर कर बच्चों की तरह खेलें या पोएट्री क्लब से जुड़ जाएँ, पेंटिंग बनाएँ, फोटोग्राफी करें या कुछ भी जो आपका शौक हो। अपने शौक का एक कलेक्शन बनाएँ और उसे प्रदर्शित करने के उपाय के बारे में सोचें।
10. किसी भी चीज़ की योजना पहले से बनाएँ। जल्दबाज़ी और अंतिम समय में बनाई गई योजनाएँ अक्सर खराब परिणाम देती हैं और फिर ये आपके तनाव का कारण बनती हैं।
11. लोगों के लिए कुछ अच्छा करें। चाहे छोटी-मोटी मदद हो या कोई बड़ी सहायता, किसी के मुस्कुराते चेहरे के साथ कहा गया धन्यवाद शब्द हमें अन्दर तक खुश और संतुष्ट कर जाता है।
12. माफ करते चलें: माफ कीजिए और खुद ही देखिए कैसी अनुभूति होती है।
13. यदि आप तनाव देने वाली स्थिति में सुधार कर सकते हैं तो सकारात्मक सोच और पूरी दृढ़ता के साथ उसमें जुट जाइए लेकिन अगर स्थिति के बेहतरीकरण में आप कुछ नहीं कर सकते तो सोचिए कि जो हो रहा है, अच्छे के लिए हो रहा है। इससे भी बुरा हो सकता था।
14. और अंत में अगर आपकी चिंता करने से कुछ होता है तो अपने स्वास्थ्य की चिंता करनी शुरु कीजिए और देखिए तनाव कैसे खुद-ब-खुद आपसे दूर हो जाता है।
तो आज ही से इन गुरों को अपनाइए और ज़िन्दगी में मिलने वाले कई सारे मौकों को जीते जाइए।

Saturday, February 20, 2010

जली रोटी

कल रोटी बनाते समय
मेरा हाथ तवे से छू गया
जलन से मैं चिल्ला उठी
उस चीख में
अचानक एक और चीख मिल गई,
पड़ोस की माथुर आंटी की
जब दो महीने पहले
उन्हें ज़िन्दा जला दिया गया था,
उनकी शिफॉन की ख़ूबसूरत गुलाबी साड़ी
भयंकर काले रंग के कूड़े के ढेर में तब्दील हो गई थी,
एक छोटी सी मासूम लड़की की
जब फूल चुनने जाने पर
गार्डन में मालिक के कुत्ते ने
उसे काट खाया था,
उस लड़के की
जब कुछ लोगों ने
उसकी पीठ में छुरा भोंक दिया था
उसकी पॉकेट से तीन सौ दस रुपए लेने के लिए ,
उस लंगड़े भिखारी की
जिसकी नज़रें टिकी थीं
भीख में मिले दस रुपए पर
तब बत्ती हरी हो गई थी
और उसके पीछे बस खड़ी थी,
दंगे में हथियार लिए
गुस्से से पागल भीड़ से भागती,
अपने बच्चे को गोद में चिपटाए
एक माँ की
जिसके बेतहाशा दौड़ते पैर
कभी साड़ी में
तो कभी बुरके के घेरे में फंस जाते हैं,
और भी कई चीखें थीं
जो आपस में इतनी बुरी तरह गुँथीं थीं
कि उन्हें पहचानना मुश्किल था।
मैंने घबराकर अपने कान बन्द कर लिए,
आवाज़ें अभी भी आ रही थीं।
धीरे-धीरे करके जब वे खत्म हुईं
तो उस चीख के खत्म होने पर
एक अजीब मरघट-सी चुप्पी थी,
उस चुप्पी में कई ख़ामोशियाँ थीं
जो
कभी गुजरात में बैठे
एक बूढ़े की आँखों में पथराती हैं,
तो कभी
काश्मीर से भागे
एक पंडित की ज़ुबाँ से चिपक जाती हैं,
कभी सड़क पर पड़े
एक लड़के की लाश से होकर गुज़र जाती हैं
जो अभी कुछ देर पहले थरथराई थी,
कभी किसी चौराहे पर सोए
एक आधे-अधूरे कंकाल पर फैलती हैं
जो कभी शायद ज़िन्दा था,
कभी एक दुल्हन को छू जाती हैं
जिसकी जली हथेलियों में
कभी मेहन्दी भी लगी थी।
एक ऐसी ख़ामोशी
जो सबसे होकर गुज़र जाती है
और सभी चुपचाप, बस चुपचाप
खड़े रह जाते हैं।
मेरा ध्यान तवे पर गया
तवे पर रखी रोटी
बुरी तरह से जल चुकी थी।

Saturday, February 6, 2010

बादलों की सफेदी पर...

बादलों की सफेदी पर अब काले रंग नहीं उभरते क्या?
दो छोटे-छोटे पंख लेकर पंछी भी अब उड़ान नहीं भरते क्या?
लगता है बारिश ने हमेशा-हमेशा के लिए घूंघट ओढ़ लिया है
हवाओं ने भी पीले-हरे पत्तों का दामन छोड़ दिया है।
आँखों से देखो तो आसमान नीला है
और आँखें बन्द करने पर कुछ दिखता ही नहीं
कोरे-कोरे कागज़ सब कोरे ही उड़ जाते हैं
क्या उनपर अब कोई अपना हाल-पता लिखता नहीं?
तितलियों और फूलों में भी बातचीत बन्द है शायद
उड़ते-खिलते दोनों एक-दूसरे को देखते तक नहीं,
या वे भी इंसानों की फेहरिस्त में आ गए
जो दोस्तों के दरवाज़े खटखटाना भूल गया,
अंगुलियों में अंगूठियाँ तो काफी हैं
पर उन अंगुलियों को कलम पकड़ाना भूल गया,
तालियों पर तालियाँ बजाता वह महफिल में
खुशी से पीठ थपथपाना भूल गया।
बादलों की सफेदी पर काले रंग नहीं आते अब
वे सब हमारे नाखूनों में उतरने लगे हैं
पेड़ तो बहुत हैं अपने हिस्से की छाया देते
पर छुईमुई के पौधे सब ज़मीन के नीचे सोने लगे हैं।
देखो ना ईश्वर तुम भी ज़रा झांककर
हर कोई इतना अलग-अलग, चुप-चुप, रूठा-रूठा सा क्यों है?
आँखों के मिलने पर मुस्कुराती हैं आँखें,
पर उन आँखों में कुछ झूठा-झूठा सा क्यों है?
मिलते हैं कभी-कभार हाथों से हाथ भी
पर उन हाथों में कुछ छूटा-छूटा सा क्यों है?
सोचो न तुम भी झाँको न एक बार
सबके लिए सबको मिलाओ न एक बार
क्या हुआ जो एक-दूसरे से टकराएँगे सारे
उस टकराहट में अपनापन मिलाओ न एक बार 
सबको फिर से जिलाओ न एक बार 
अंगुलियों को अंगुलियों से पिराओ न एक बार 
धड़कनों को धड़कनों से मिलाओ न एक बार 
बारिश के घूँघट को हटाओ न एक बार 
आसमाँ पर काला रंग बिखराओ न एक बार 
इस बारिश में तुम भी नहाओ न एक बार।